डॉ. अरुण कुमार भादुड़ी

डॉ. अरुण कुमार भादुड़ी ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर से धातु विज्ञान अभियांत्रिकी क्षेत्र में वर्ष 1983 में बी.टेक (ऑनर्स) और वर्ष 1992 में पीएच.डी. की उपाधिप्राप्त की ।  आपने वर्ष 1983 में ट्रांबे स्थित भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के प्रशिक्षण स्कूल में शामिल हुए और 27वें बैच के ओवरऑल टॉपर होने पर आपको होमी भाभा पदक से  सम्मानित किया गया था । आप वर्ष 1984 में  इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केन्द्र, कल्पाक्कम में शामिल हो गए, जहाँ आप विभिन्न जिम्मेदारियाँ निभाते हुए धातुकर्म एवं सामग्री समूह के निदेशक बने तथा 1 जुलाई 2016 को इस केंद्र के 11 वें निदेशक के रूप में कार्यभार संभाला । इसके अतिरिक्त होमी भाभा राष्ट्रीय संस्थान में वरिष्ठ प्रोफेसर के रूप में भी अपनी सेवाएँ दे रहे हैं ।

            आपने वर्ष 1994 में अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट फाउंडेशन, जर्मनी से हम्बोल्ट रिसर्च फैलोशिप प्राप्त कर दो साल तक स्टुटगार्ट विश्वविद्यालय जर्मनी में पोस्ट डॉक्टरेट अनुसंधान किया ।  सोडियम कूल्ड फास्ट रिएक्टर, फ्यूज़न रिएक्टर और एडवांसड अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर संबंधी भारतीय कार्यक्रमों के लिए आप, सामग्रियों और उनके विनिर्माण प्रौद्योगिकियों के विकास के समन्वयक हैं । सामग्रियों को जोड़ने के क्षेत्र में आपको महारत हासिल हैं, और आपके श्रेय में 210 से अधिक पत्रिकाओं में प्रकाशन, 350 सम्मेलन प्रस्तुतियां  और 2 अंतरराष्ट्रीय पेटेंट भी हैं ।

आपको, वेल्डिंग और हार्डफेसिंग के विज्ञान एवं  प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आपके योगदान के लिए इस्पात मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय घातुकर्मी दिवस पर धातुविद् वार्षिक पुरस्कार (2003);  परमाणु ऊर्जा विभाग (पऊवि), भारत सरकार द्वारा होमी भाभा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पुरस्कार (2002);  इंडियन न्यूक्लियर सोसाइटी  द्वारा आईएनएस स्वर्ण पदक पुरस्कार (2002); विविधलक्ष्यी औद्योगिक संशोधन विकास केंद्र द्वारा VASVIK पुरस्कार (2005) प्रदान किए गए; वर्ष 2006 से 2014 के दौरान ग्रुप लीडर की हैसियत में तीन बार,  और कुल मिलाकर नौ बार, परमाणु ऊर्जा विभाग के समूह उपलब्धि पुरस्कार प्राप्त किए । इनके अलावा, आपको सर एल.पी. मिश्रा मेमोरियल व्याख्यान पुरस्कार (2010) और भारतीय वेल्डिंवग संस्थान द्वारा आईआईडब्ल्यू-भारत स्वर्ण जयंती वेल्डिंग रत्न पुरस्कार (2016) से भी सम्मानित किया गया है ।  वर्ष 2007 में आपको भारतीय राष्ट्रीय इंजीनियरिंग अकादमी (FNAE) के अध्येता  के रूप में निर्वाचित किया गया ।  आप भारतीय धातु संस्थान (FIIM) और भारतीय वेल्डिंग संस्थान (FIIW) के  अध्येता भी हैं ।  आपने भारतीय वेल्डिंग संस्थान से कई बार विभिन्न प्रकार के बेस्ट पेपर पुरस्कार भी प्राप्त कर चुके हैं ।

अंतरराष्ट्रीय वेल्डिंग संस्थान मेंआप आर्क वेल्डिंग और पूरक धातु आयोग-द्वितीय के उपाध्यक्ष (2104 से) हैं, वेल्डिंग इन द वर्लड के संपादकीय बोर्ड (2008 से) के सदस्य के रूप में योगदान दे रहे हैं तथा संस्थान के तकनीकी प्रबंधन बोर्ड (2007-2010) के सदस्य भी रह चुके हैं । इसके साथ ही, आप सामग्री प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी (2007 से) शोधपत्रिका, अंतरराष्ट्रीय नाभिकीय ऊर्जा शोधपत्रिका, सामग्री विज्ञान भारतीय शोधपत्रिका (2013 से) और भारतीय वेल्डिंग शोधपत्रिका (2002 से) के संपादकीय मंडल के सदस्य के रूप में भी काम कर रहे हैं । आप भारतीय वेल्डिंग संस्थान के तकनीकी समिति के अध्यक्ष (2005-2008) एवं संस्थान के उपाध्यक्ष (2008-2012) तथा भारतीय धातु संस्थान की कार्यवाही (1992-2003) के संपादक भी रह चुके हैं ।


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