Right to Information Act 2005 - IGCAR
Suo-Motu disclosure under section-4 of RTI ACT
इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र, कल्पाeक्कaम, तमिलनाडु-603102 के संबंध में सूचना

संसद ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 पारित किया था और उसे भारत के राजपत्र में 21 जून 2005 को प्रकाशित किया गया था। उक्त अधिनियम की धारा 4(1) के तहत, सभी सरकारी संगठनों को अपने विभाग से संबंधित विशिष्ट सूचनाओं को स्व त: प्रकाशित करने की आवश्यकता है जिससे संगठन से संबंधित जानकारी चाहने वाले भारतीय नागरिक उसे आसानी से पा सके। तदनुसार, इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र, परमाणु ऊर्जा विभाग, कल्पा्क्काम-603103, तमिलनाडु ने भारत सरकार के तहत एक सरकारी संगठन होने के नाते नागरिकों की सुविधा के लिए वेबसाइट पर निम्नलिखित सूचनाएँ उपलब्ध कराई हैं।

i. इंगांपअकें कें संगठन, कार्यों एवं कर्तव्योंा का विवरण [धारा- 4(1)(b)(i)]

  • इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (इंगाँपअकें) की स्थापना वर्ष 1971 में भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग के तहत की गई थी। यह केंद्र फास्ट ब्रीडर रिएक्टर टेक्नालॉजी के विकास की दिशा में निर्देशित वैज्ञानिक अनुसंधान और उन्नत अभियांत्रिकी के व्यापक बहु-विषयक कार्यक्रम के संचालन में संलग्न है। केंद्र में, अनूठे प्लूटोनियम-यूरेनियम मिश्रित कार्बाइड ईंधन पर आधारित फास्ट ब्रीडर परीक्षण रिएक्टर, जोकि दुनिया में अपनी तरह का पहला रिएक्टर है और कामिनी रिएक्टर जो U233 को ईंधन के उपयोग करने वाले दुनिया में प्रचालनाधीन एकमात्र रिएक्टर है, दोनों का सफलतापूर्वक प्रचालन किया जा रहा है। 500 MWe प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर का अभिकल्पन पूरा हुआ और कल्पा3क्कवम में निर्माण के उन्नरत चरण में है।


  • इंगांपअकें जो भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के बाद परमाणु ऊर्जा विभाग की दूसरी सबसे बड़ी इकाई है, की स्थाइपना, 1971 में चेन्नई [मद्रास] से 80 किलोमीटर दक्षिण में स्थित कल्पानक्कतम में की गई। यह केंद्र भारत में सोडियम शीतित फास्ट ब्रीडर रिएक्टर [एफबीआर] प्रौद्योगिकी के विकास की दिशा में निर्देशित वैज्ञानिक अनुसंधान और उन्नत अभियांत्रिकी के व्यापक बहु-विषयक कार्यक्रम के संचालन के मुख्य उद्येश्य से गठित किया गया है। यह भारतीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य बड़े पैमाने पर मौजूद थोरियम भंडार के उपयोग के लिए देश को तैयार करना और 21वीं सदी में विद्युत ऊर्जा की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए साधन उपलब्ध कराना है।


  • अपने उद्देश्यों को पूरा करने हेतु, फ्रेंच रिएक्टर, रैप्सोडी पर आधारित 40 MWt की नाभिय शक्ति के साथ सोडियम शीतित फास्ट ब्रीडर परीक्षण रिएक्टर [एफबीटीआर] का निर्माण करके एक मामूली शुरुआत की गई थी। इस रिएक्टर ने 18 अक्टूबर, 1985 को अपनी पहली क्रांतिकता प्राप्त की और एक छोटे क्रोड के साथ 10.5 MWt के अपने अधिकतम प्राप्य ऊर्जा स्तर पर प्रचालनरत रहा है। यह चालक ईंधन के रूप में प्लूटोनियम, यूरेनियम मिश्रित कार्बाइड का उपयोग करने वाला दुनिया में अपनी तरह का पहला रिएक्टर है। कालांतर में केंद्र ने सोडियम प्रौद्योगिकी, रिएक्टर अभियांत्रिकी, रिएक्टर भौतिकी, धात्विकी एवं पदार्थ विज्ञान, ईंधन और इनके पदार्थों का रसायन विज्ञान सामग्री, ईंधन पुनर्संसाधन, रिएक्टर सुरक्षा, नियंत्रण और मापयंत्रण, कंप्यूटर अनुप्रयोग इत्यादि से संबंधित एफबीआर प्रौद्योगिकी के सभी आयामों को समाहित करते हुए व्यापक अनुसंधान एवं विकास सुविधाएं स्थापित की हैं और इस उन्नत तकनीक से संबंधित विभिन्न विषयों में एक मजबूत आधार विकसित किया है। एफबीटीआर के सफल संचालन से प्राप्त अनुभव और विशेषज्ञता के आधार पर केंद्र ने 500 MWe प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर [पीएफबीआर] के अभिकल्पन एवं निर्माण का काम शुरू किया है। पीएफबीआर का निर्माण आरंभ करने से पूर्व, संरचनात्मक यांत्रिकी, ताप द्रवचालित और प्रवाह प्रेरित कंपन, उच्च तापमान युक्त सोडियम वातावरण में घटक परीक्षण, सोडियम-जल अभिक्रिया, सोडियम पंपों का हाइड्रोलिक विकास आदि के क्षेत्रों में विभिन्न अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।


  • ईंधन चक्र को संवृत्त करने के प्रयास के अंतर्गत, एक द्रुत रिएक्टर ईंधन पुनर्संसाधन संयंत्र का अभिक्लपन, निर्माण, कमीशनन किया गया जो इस समय प्रचालनाधीन है। न्यूट्रॉन रेडियोग्राफी, न्यूट्रॉन सक्रियण विश्लेषण आदि के लिए U233 ईंधन से चलने वाले एक 30 KWt मिनी रिएक्टर [कामिनी] को प्रचालनरत कर दिया गया है। इंगाँपअकें मूलभूत, अनुप्रयुक्त और अभियांत्रिकी विज्ञान की विभिन्न शाखाओं जैसे संरचनात्मक यांत्रिकी, ऊष्मा एवं द्रव्यमान अंतरण, पदार्थ विज्ञान, संविरचन प्रक्रिया, अविनाशी परीक्षण, रासायनिक संवेदक, उच्च ताप ऊष्मागतिकी, विकिरण भौतिकी, कंप्यूटर विज्ञान आदि जैसे नाभिकीय प्रौद्योगिकी से संबंधित विज्ञान के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता और संसाधनों के उपयोग से अनुसंधान के एक प्रमुख केंद्र के रूप में अपने अस्थित्व को मजबूती प्रदान कर रहा है।


  • यह केंद्र नाभिकीय तकनीकी से संबंधित महत्वपूर्ण क्षेत्रों के अलावा, विभिन्न अग्रणी और सामयिक विषयों जैसे आंशिक क्रिस्टल, ऑक्साइड सुपरकंडक्टर, नैनो-स्ट्रक्चर, क्लस्टर, स्क्विड फैब्रिकेशन प्रोग्राम, एक्सोपॉलिमर और कोलाइड्स के उपयोग से संघनित पदार्थ के प्रयोगात्मक अनुकरण आदि में श्रेष्ठ अनुसंधान संगठन के रूप में प्रतिष्ठित है। इंगाँपअकें ने विशिष्ट समस्याओं के विश्वसनीय समाधान हेतु तकनीक विकसित करने के लिए रक्षा, अंतरिक्ष जैसे अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों सहित भारत के अन्य उद्योगों को अपनी विशेषज्ञता और सुविधाएं प्रदान की है। इसके अंतर्गत यह केंद्र भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भारतीय विज्ञान संस्थान, पिलानी, क्षेत्रीय इंजीनियरिंग कॉलेज, राष्ट्रीय अनुसंधान प्रयोगशालाओं, सार्वजनिक इकाइयों और विदेशी संस्थानों जैसे शैक्षिक तथा अनुसंधान एवं विकास संस्थानों के साथ सहयोग करता है।


  • वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की तकनीकी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए एक आधुनिक पुस्तकालय सेवारत है, जिसमें सभी विषयों को मिलाकर 62,000 पुस्तकें, 41,000 पिछले खंड, लगभग 920 पत्र-पत्रिकाएँ और 1.95 लाख रिपोर्ट शामिल हैं । परिशुद्ध घटकों के संविरचन हेतु केंद्रीय कार्यशाला अत्याधुनिक मशीनों से पूरी तरह सुसज्जित है।


  • प्रयोक्ताओं की संगणनात्मक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कंप्यूटर प्रभाग में सिलिकॉन ग्राफिक्स पावर चैलेंज एल सर्वर, एसजीआई वर्क स्टेशन, 8 नोड ज़ीऑन सर्वर मौजूद हैं। 1187 इंजीनियरों और वैज्ञानिकों सहित केंद्र के पास 2814 कर्मचारियों की स्वीकृत श्रमशक्तिर उपलब्ध है।


  • केंद्र का नेतृत्व प्रतिष्ठि8‍त वैज्ञानिक डॉ. बी. वेंकटरामन द्वारा किया जा रहा है।.

ii. संगठन, कार्यों और कर्तव्यों का विवरण [धारा 4(1)(बी)(i)]
क. निदेशक : निदेशक, इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र के प्रमुख हैं और केंद्र के मिशनों के कार्यान्वयन के लिए उत्तशरदायी हैं। निदेशक, सचिव, परमाणु ऊर्जा विभाग और अध्यक्ष, परमाणु ऊर्जा आयोग को रिपोर्ट करते हैं। निदेशक, इंगांपअकें के तहत पदानुक्रमित सेट-अप नीचे दर्शाया गया है:

निदेशक

समूह निदेशक

निदेशक (कार्मिक एवं प्रशासन)

आंतरिक वित्ती य सलाहकार

सह निदेशक

प्रशासन अधिकारी-III

उप लेखा नियत्रंक

प्रभागाध्ययक्ष

प्रशासन अधिकारी-II

भुगतान एवं लेखा अधिकारी

अनुभागाध्य क्ष

सहायक कार्मिक अधिकारी

सहायक लेखा अधिकारी

वैज्ञानिक अधिकारी

प्रशासनिक कार्मिक

लेखा अनुभाग के कार्मिक

तकनीकी एवं सहायक कर्मचारी

ख. समूह निदेशक: केंद्र की गतिविधियों को निम्नलिखित समूहों के तहत अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:
इलेक्ट्रॉनिक्स और इंस्ट्रुमेंटेशन ग्रुप         [ईआईजी]
अभियांत्रिकी सेवा समूह         [ईएसजी]
द्रुत रिएक्टर ईंधन चक्र सुविधा        [एफआरएफसीएफ]
पदार्थ रसायन विज्ञान और धातु ईंधन चक्र समूह    [एमसी और एमएफसीजी]
पदार्थ विज्ञान समूह       [एमएसजी]
धातुकर्म और पदार्थ समूह       [एमएमजी]
रिएक्टर डिजाइन और प्रौद्योगिकी समूह       [आरडीटीजी]
रिएक्टर सुविधाएं समूह    [आरएफजी]
पुनर्संसाधन समूह       [आरपीजी]
सुरक्षा, गुणवत्ता और संसाधन प्रबंधन समूह    [एसक्यूज एंड आरएमजी]

समूह निदेशक समूह के उद्देश्यों के कार्यान्वयन के लिए उत्तेरदायी हैं और निदेशक इंगांपअकें को रिपोर्ट करते हैं। समूह की गतिविधियों के प्रबंधन के लिए आवश्यकतानुसार समूह के निदेशकों को विभिन्न शक्तियाँ प्रदान की गई हैं।

क. सह निदेशक: एक समूह में सह निदेशक, समूह निदेशक के बाद अगले स्तर के अधिकारी होते हैं और समूह के अंदर उप समूह की गतिविधियों के लिए सीधे उत्त रदायी होते हैं। समूह की गतिविधियों के प्रबंधन के लिए आवश्यक विभिन्न शक्तियाँ सह निदेशकों को प्रदान की गई हैं।

ख. प्रभागाध्यीक्ष: समूह निदेशक/सह निदेशक के नेतृत्व वाले प्रत्येक समूह/उप समूह को विभिन्न प्रभागों के विभिन्न प्रमुखों के अधीन कई प्रभागों में विभाजित किया गया है। प्रभागों के प्रमुख अपने-अपने प्रभागों के उद्देश्यों के कार्यान्वयन के लिए उत्तरदायी होते हैं। प्रभागों को आमतौर पर वरिष्ठ वैज्ञानिकों की अध्यक्षता वाले अनुभागों में विभाजित किया जाता है जिन्हें अनुभाग प्रमुख के रूप में पदनामित किया जाता है और कुछ शक्तियों के साथ अधिकृत किया जाता है।

ग. निदेशक (कार्मिक एवं प्रशासन): निदेशक (कार्मिक एवं प्रशासन) केंद्र से संबंधित सभी प्रशासनिक मामलों को संभालने के लिए उत्त:रदायी है। वे निदेशक, इंगांपअकें को रिपोर्ट करते हैं। निदेशक, इंगांपअकें को प्रशासनिक कार्यों के लिए इंगांपअकें के संबंध में विभाग प्रमुख के रूप में पदनामित किया गया है। तथापि, प्रशासनिक सुविधा के लिए, कुछ मामलों में विभाग प्रमुख की शक्तियों को निदेशक (कार्मिक और प्रशासन), इंगांपअकें को पुन: प्रत्यायोजित कर दिया गया है।

घ. आंतरिक वित्तीय सलाहकार: आंतरिक वित्तीय सलाहकार केंद्र की लेखा स्कंध का प्रमुख होता है। वे केंद्र के सभी खातों से संबंधित मामलों को संभालने के लिए उत्तकरदायी होते हैं। आंतरिक वित्तीय सलाहकार निदेशक, इंगांपअकें को रिपोर्ट करता है।

ङ. प्रशासनिक अधिकारी: प्रशासनिक अधिकारी केंद्र के प्रशासनिक स्ंएकद (विंग) में द्वितीय स्तर का अधिकारी होता है, और निदेशक (कार्मिक और प्रशासन) को रिपोर्ट करता है। इंगांपअकें में प्रशासनिक अधिकारी (कार्मिक) प्रशासनिक कार्यों के लिए कार्यालय प्रमुख होता है।

च. उप लेखा नियंत्रक: उप लेखा नियंत्रक केंद्र के लेखा स्ंलकद (विंग) में द्वितीय स्तर का अधिकारी है, और आंतरिक वित्तीय सलाहकार को रिपोर्ट करता है।

iii.निर्णय लेने की प्रक्रिया में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया [धारा 4(1)(b)(iii)]

जैसा कि किसी भी अन्य सरकारी संगठन के मामले में होता है, निर्णय लेने की प्रक्रिया में इंगांपअकें में श्रृंखलागत नियंत्रण समेत एक परिभाषित पदानुक्रमित व्यवस्था होती है। कर्मचारियों का एक समूह अनुभागाध्यअक्ष के अधीन एक अनुभाग बनता है और कुछ अनुभाग के समावेश से एक प्रभागाध्यएक्ष के अधीन एक प्रभाग का गठन होता है। इसी तरह, प्रभाग के प्रमुख समूह निदेशकों के अधीन कार्य करते हैं जो निदेशक, इंगांपअकें को रिपोर्ट करते हैं, जो इकाई का प्रमुख होता है। इंगांपअकें परिषद, निदेशक सलाहकार समिति, इंगांपअकें वैज्ञानिक समिति ऐसे निकाय हैं जो निदेशक की अध्यक्षता में गठित होते हैं और निर्णय लेने की प्रक्रिया में भाग लेते हैं। निदेशक की अध्यक्षता में भंडार एवं क्रय समिति अधिक मूल्य की वस्तुओं की खरीद पर निर्णय लेती है। ऊपर बताए अनुसार कमान की श्रृंखला के माध्यम से संबंधित अधिकारियों के स्तर के अनुरूप पर्यवेक्षण और जिम्मेदारी तय की गई है। इस संबंध में विवरण इंगांपअकें की वेबसाइट www.igcar.gov.in पर उपलब्ध है।

iv. कार्यों के निर्वहन के लिए मानदंड [धारा 4(1)(b)(iv)]

केंद्र सरकार के अन्य कार्यालयों पर लागू होने वाले नियम व विनियम तथा प्रक्रियाओं को इंगांपअकें में भी विभिन्न प्राधिकरियों द्वारा कार्यों के निर्वहन के लिए मानदंडों के रूप में स्वीकार किया जाता है।

v.कार्यों के निर्वहन के लिए नियम, विनियम, निर्देश मैनुअल और रिकॉर्ड [धारा 4(1)(b)(v)]

भारत सरकार (कार्य आवंटन) नियम, 1961; भारत सरकार (कार्यकरण) नियम, 1961

परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और कार्यालय कार्यपद्धति के तहत बनाए गए नियम

वित्तीय शक्तियों का प्रयोग (पऊवि) नियम, 1978

सभी केंद्रीय सिविल सेवा नियम

स्थानांतरण नीति और स्थानांतरण आदेश

vi.प्राधिकरण द्वारा अपने नियंत्रण में रखे जाने वाले दस्तावेजों की श्रेणियां [धारा 4(1)(b)(vi)]

इस संबंध में दस्तावेजों की श्रेणियों में विशेषकर वार्षिक रिपोर्ट, समाचार पत्र, प्रगति रिपोर्ट, तकनीकी रिपोर्ट, विभिन्न सुविधाओं और उपकरणों के आवेदन के लिए नियमावली, वैज्ञानिक प्रकाशन जैसे पत्रिकाओं, पुस्तकों, नियम पुस्तकों के अलावा केंद्र सरकार द्वारा जारी अन्य पुस्तकों के रूप में दर्शाया जा सकता है।

vii.सार्वजनिक प्राधिकरण के भाग के रूप में गठित बोर्ड, परिषद, समितियां और अन्य निकाय [धारा 4 (1) (b) (ix)]

इंगांपअकें में तीन मुख्य निकाय हैं जो आईजीसी परिषद, निदेशक सलाहकार समिति (डीएसी) और इंदिरा गांधी केंद्र वैज्ञानिक समिति (आईजीसीएससी) हैं जो नीतियों और कार्यक्रमों को व्यापक तरीके से निर्धारित करते हैं। इसके अलावा, कई निकाय हैं जिनके कार्य सलाहकार या अनुशंसात्मक प्रकृति के हैं जो यूनिट के प्रमुख को कर्तव्यों के निर्वहन के लिए सहायता करते हैं। इसमें भर्ती और पदोन्नति आदि के लिए चयन या तदर्थ समिति सहित कई स्थायी समितियां शामिल हैं।

viii. केंद्र के अधिकारी और कर्मचारियों की निर्देशिका [धारा 4(i)(b)(i)]

ix प्रतिकर (प्रतिपूर्ति) की प्रणाली सहित अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा प्राप्त मासिक पारिश्रमिक [धारा 4(1)(b)(x)]

x. जन सूचना अधिकारियों के नाम, पदनाम और अन्य विवरण [धारा 4(1)(b)(xvi)]

xi. उन कर्मचारियों की संख्या जिनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित/की गई है [धारा 4(2)]

  • कर्मचारियों की संख्या जिनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है

  • (i) छोटी या बड़ी शास्ति के लिए कार्यवाही लंबित - 4

  • (ii) छोटी या बड़ी शास्ति के लिए कार्यवाही संपन्न - 2

xii. आरटीआई [धारा 26] संबंधी जानकारी हेतु संचालित कार्यक्रम

  • प्रशिक्षण कार्यक्रम एटीआई, पऊवि द्वारा संचालित किए जाते हैं ।